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हरीश रावत उत्तराखंड के ऐसे विरले नेताओं में हैं जो पहाड़ के दुर्गम से दुर्गम तक के गांवों में पहुंचे

हरीश रावत उत्तराखंड के ऐसे विरले नेताओं में हैं जो पहाड़ के दुर्गम से दुर्गम तक के गांवों में पहुंचे

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए सभी 70 सीटों पर मतदान 14 फरवरी को होने हैं। समय कम होने के कारण प्रत्याशियों की व्यस्तताएं बढ़ गई हैं। मैदान में स्टार प्रचारकों की फौज उतर आई है। यह चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस चुनाव प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत के लिए भी काफी अहमियत रखता है।हरीश रावत उत्तराखंड के ऐसे विरले नेताओं में हैं जो पहाड़ के दुर्गम से दुर्गम तक के गांवों में पहुंचे हैं। वह 73 साल की उम्र में फुटबाल और कबड्डी खेलते हुए नजर आते हैं, तो सुबह से लेकर देर रात तक लगातार प्रचार अभियान में बिना थके डटे हैं।  कहा जाता है कि वह कांग्रेस के ऐसे नेता हैं जो अगर चुनाव हारते भी हैं तो अगले चुनाव में दोगुनी ताकत और ऊर्जा के साथ सामने आते हैं। तमाम व्यस्तताओं के बावजूद हरीश रावत जिन्हें उत्तराखंड के लोग सम्मान में “हरदा” भी कहते हैं, ने समय निकालकर दैनिक जागरण से बातचीत की।

हरीश रावत : उत्तराखंड में कांग्रेस ही भाजपा का विकल्प है। कांग्रेस पास समझदार लीडरशिप की बैंक स्ट्रेंथ और फ्रंट लाइन भी है। जबकि भाजपा सरकार पांच साल में हर मोर्चे पर फेल हुई है। एेसे दो विकल्पों पर ही जनता को निर्णय लेना है तो स्वाभाविक तौर जनादेश कांग्रेस को मिल रहा है। हमने पहले भी कुछ ऐसे नीतिगत निर्णय लिए हैं जो राज्य के हित में रहे हैं, उनको भाजपा ने बंद कर दिया था। जनता चाहती है कि विकास की वह येजनाएं फिर से शुरू हों। एक बात और बीते चुनाव में मोदी लहर के बावजूद 33 फीसद से अधिक वोट कांग्रेस पार्टी को मिला था। यानी कांग्रेस पोलरइजेशन के दौरान भी जनता के दिलों में थी।

यह चुनाव उत्तराखंडियत और उत्तराखंड को बचाने के लिए कांग्रेस पार्टी लड़ रही है। उत्तराखंड में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार चरम पर है। भाजपा ने पहले चार साल तक प्रदेश को लूटा और फिर जनता को मूर्ख बनाने के लिए सिर्फ मुख्यमंत्री बदलने का काम किया है। कोविड के दौरान लोगों को बेसहारा छोड़ दिया गया, इलाज के अभाव में लोगों की मौत हो गई। उत्तराखंड की जनता इस बात को कभी नहीं भूलेगी। मेरे शासनकाल में जो विकास हुआ। उसे भी भाजपा सरकार ने आगे नहीं बढऩे दिया गया। मंडुवा, झिंगोरा आदि मोटे अनाजों पर बोनस बंद कर दिया गया। लोक कल्याणकारी योजनाएं भी बंद कर दीं। एक परिवार में दो पेंशन बंद करा दी। एपीएल परिवारों को सस्ता राशन भी बंद कर दिया गया। ऐसी तमाम योजनाएं हैं, जिन्हें या तो बंद कर दिया या फिर उन परियोजनाओं का स्वरूप ही बदल दिया।

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