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कोरोना संक्रमण से राहत के बाद दून और आसपास के इलाकों में डेंगू का कहर

कोरोना संक्रमण से राहत के बाद दून और आसपास के इलाकों में डेंगू का कहर

इस समय कोरोना संक्रमण से राहत जरूर है, लेकिन दून और आसपास के इलाकों में डेंगू का कहर बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को जिले में तीन और व्यक्तियों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इनमें 18 वर्षीय युवक बद्रीश कालोनी का रहने वाला है, जो कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती है। इसके अलावा न्यू फारेस्ट कालोनी इंदिरानगर निवासी 15 वर्षीय किशोर और व्योमप्रस्थ एन्क्लेव जीएमएस रोड निवासी 51 वर्षीय व्यक्ति में भी डेंगू की पुष्टि हुई है। दोनों मरीज घर में ही स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। जिले में अब तक डेंगू के 24 मामले मिल चुके हैं। देहरादून में डेंगू के बढ़ते डंक से स्वास्थ्य महकमा सकते में है, क्योंकि डेंगू की बीमारी फैलाने वाले मच्छर के लिए मौजूदा मौसम मुफीद माना जाता है। वातावरण में ठंडक होने पर ही मच्छर निष्क्रिय होता है। हालांकि, विभागीय अधिकारी दावा कर रहे हैं कि नगर निगम के सहयोग से शहरभर में दवा का छिड़काव और फागिंग की जा रही है। जिन इलाकों में डेंगू के मामले मिल रहे हैं, वहां पर सघन फागिंग की जा रही है।

आसपास के निवासियों को भी स्वच्छता बनाए रखने और डेंगू से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है। जन सामान्य से भी अपील की जा रही है कि वह अपने घर में खाली बर्तनों में पानी जमा न होने दें। डेंगू की बीमारी फैलाने वाला एडीज मच्छर रुके हुए साफ पानी में ही पनपता है।दून मेडिकल कालेज चिकित्सालय में एमआरआइ मशीन की लंबे समय से चली आ रही मांग अब जल्द ही पूरी हो जाएगी। उम्मीद है कि नया साल शुरू होते-होते अस्पताल को मशीन मिल जाएगी। टेंडर में एक ही कंपनी आने के बाद अब शासन ने रास्ता निकाला है। जिस कंपनी से हरिद्वार में मशीन खरीदी गई है, अस्पताल के लिए मशीन का आर्डर भी उसी को दिया जाएगा।

दून मेडिकल कालेज अस्पताल की एमआरआइ मशीन करीब डेढ़ साल से ठप है। मौजूदा मशीन तकरीबन 14 साल पुरानी है। समस्या ये है कि अब इसके पार्ट मिलने में भी मुश्किल आ रही है। वहीं मरम्मत का खर्च भी बहुत ज्यादा आ रहा है। ऐसे में कालेज प्रशासन ने नई मशीन खरीदने का फैसला किया। अस्पताल की ओर से नई मशीन आने तक ठेके पर किसी निजी लैब से एमआरआइ कराए जाने की भी पहल की गई, पर दरें कम होने के कारण किसी ने भी इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। अस्पताल में एमआरआइ की सुविधा न होने के कारण मरीजों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है।विभिन्न हादसों एवं न्यूरो संबंधी मरीजों को ज्यादा दिक्कत हो रही है। बता दें कि निजी केंद्र में एमआरआइ आठ से दस हजार रुपये तक में होती है, जबकि दून अस्पताल में साढ़े तीन हजार में। अस्पताल में रोजाना तकरीबन 20-25 एमआरआइ की जाती थी। जिस पर ब्रेक लगा हुआ है। प्राचार्य डा. आशुतोष सयाना का कहना है कि मरीजों की परेशानियों को देखते हुए कालेज एवं शासन स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि अगले तीन माह में नई मशीन लग जाएगी।

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