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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा के लंबे गढ़वाल दौरे के बाद क्षेत्र में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा के लंबे गढ़वाल दौरे के बाद क्षेत्र में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा के लंबे गढ़वाल दौरे के बाद क्षेत्र में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है। इस दौरे से मिले फीडबैक के आधार पर माहरा इस क्षेत्र की उपेक्षा को लेकर उपजे रोष को दूर करने के लिए पार्टी हाईकमान को सुझाव देंगे। आने वाले समय में संगठन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व मजबूत होता दिखाई दे सकता है।

प्रदेश में कांग्रेस की ओर से की गई नियुक्तियों में गढ़वाल मंडल की उपेक्षा का मुद्दा तूल पकड़ गया था। इस क्षेत्र में कांग्रेस संगठन के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पांचवीं विधानसभा के चुनाव में गढ़वाल क्षेत्र की 30 विधानसभा सीटों में से मात्र तीन सीटें ही कांग्रेस के खाते में आई हैं।पार्टी के लिए ये चिंता का विषय है। लगातार दूसरी बार विधानसभा चुनाव में पार्टी की बुरी गत हुई है। इससे पहले यानी चौथी विधानसभा के चुनाव में पार्टी को सिर्फ दो सीटों पर संतोष करना पड़ा था। भविष्य में यही स्थिति बरकरार रही तो कांग्रेस के सामने अस्तित्व का संकट उपस्थित होना तय है।

यही कारण है कि नए प्रदेश अध्यक्ष माहरा ने जिम्मेदारी संभालने के बाद सबसे पहले गढ़वाल क्षेत्र में 12 दिनी भ्रमण कार्यक्रम तय किया। इस कार्यक्रम में दो दिन की कटौती चम्पावत उपचुनाव के चलते करनी पड़ी थी।माहरा ने भ्रमण के दौरान जनसभा से गुरेज किया और छह जिलों में सक्रिय कार्यकर्ताओं और पार्टी के लिए लंबा जीवन खपाने वाले नेताओं से मुलाकात की। इस मुलाकात का प्रभाव दिखने लगा है। असंतोष के चलते पार्टी से कटते दिख रहे नेता पुरानी लय में लौटते दिखाई दे रहे हैं। इससे माहरा को भी नई ऊर्जा मिली।

आगामी अगस्त माह में प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नई कार्यकारिणी अस्तित्व में आनी है। माहरा ये संकेत दे चुके हैं कि इस बार कार्यकारिणी जंबो नहीं रहेगी। पदाधिकारी सीमित संख्या में रहेंगे, लेकिन सक्रिय और निष्ठावान को ही तरजीह दी जाएगी।अब माना जा रहा है कि गढ़वाल दौरे के बाद माहरा क्षेत्र में असंतोष को दूर करने के लिए जल्द संतुलन साधने के फार्मूले के साथ पार्टी हाईकमान से वार्ता कर सकते हैं। नए संगठन में गढ़वाल को तरजीह दिखाई पड़ सकती है।

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