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मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि एपिडा के सहयोग से अन्तरराष्ट्रीय बाजार के लिए राज्य के जो उत्पाद भेजे जा रहे

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि एपिडा के सहयोग से अन्तरराष्ट्रीय बाजार के लिए राज्य के जो उत्पाद भेजे जा रहे

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय से एपिडा के माध्यम से उत्तराखण्ड में उत्पादित आम की प्रथम खेप, शहद एवं राजमा के अन्तरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात हेतु भेजे जा रहे वाहनों का फ्लैग ऑफ किया। इस अवसर पर 1.5 टन आम, 28 टन राजमा एवं 80 टन शहद का अन्तरराष्ट्रीय बाजार के लिए निर्यात किया गया।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि एपिडा के सहयोग से अन्तरराष्ट्रीय बाजार के लिए राज्य के जो उत्पाद भेजे जा रहे हैं, यह सराहनीय पहल है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों की अन्तरराष्ट्रीय मार्केटिंग के लिए गुणात्मक वृद्धि होगी। उत्पादन को कैसे अच्छी मार्केटिंग मिले इस दिशा में सरकार द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे स्थानीय उत्पादों को अधिक से अधिक बढ़ावा मिले इसके लिए और अधिक प्रयासों की जरूरत है। राज्य में किसानों की आजीविका को बढ़ाने के लिए एवं आवश्यक सभी व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने के लिए कृषि कलेण्डर भी बनाया गया है। उत्तराखण्ड के छोटे कृषकों की आर्थिकी को बढ़ाने के लिए कलस्टर के विकास हेतु, सहकारिता, कृषि एवं उद्यान विभाग के माध्यम से अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट से पूर्व कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ संवाद किया गया।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों की आय दुगुनी करने का जो संकल्प लिया है, उस संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने के लिए उत्तराखण्ड में राज्य सरकार द्वारा पूरे प्रयास किये जा रहे हैं। केन्द्र एवं राज्य सरकार की कृषि कल्याण से संबंधित योजनाओं को समाज के अंतिम पंक्ति के लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। 2025 में उत्तराखण्ड राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती मनायेगा, तब तक किसानों की आजीविका वृद्धि के लिए कृषि, उद्यान, सिंचाई एवं अन्य संबंधित विभाग पॉयलट प्रोजेक्ट के रूप में क्या कर सकते हैं, इस पर विशेष ध्यान दिया जाए। राज्य के रजत जयंती वर्ष पर सभी विभागों को कुछ ऐसे कार्य करने होंगे, जो देश एवं हिमालयी राज्यों के लिए मॉडल हों।

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