ताजा खबरें >- :
बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के डॉक्टर हटेंगे पहाड़ से,

बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के डॉक्टर हटेंगे पहाड़ से,

स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए तैनात किए गए बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के डॉक्टरों को प्रदेश के पर्वतीय जिलों से कम कर मैदानी जिलों में शिफ्ट किया जाएगा।  राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से इसका निर्णय लिया गया है।  एनएचएम के अफसरों के इस फैसले से पहाड़ के स्कूलों में स्क्रीनिंग में परेशानी खड़ी हो सकती है। उत्तरकाशी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने इस संदर्भ में एनएचएम के अफसरों को पत्र भी लिखा है। विदित है कि 18 साल तक की उम्र के बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण और स्क्रीनिंग के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत राज्य में 148 टीमें तैनात की गई हैं जो हर स्कूल और आंगनबाड़ी में जाकर बच्चों की सेहत का परीक्षण करती है। सामान्य बीमारी वाले बच्चों को उपचार दिया जाता है जबकि गंभीर बीमार बच्चों को हायर सेंटर भेजा जाता है और देश के नामी अस्पतालों में ऐसे बच्चों का निशुल्क इलाज किया जाता है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत वर्ष 2018-19 में राज्य में कुल 16 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। इसमें से 33 हजार के करीब बच्चों को बीमार पाया गया था।

 

किस जिले से कितनी टीमें कम होंगी 
अल्मोडा से तीन, बागेश्वर से एक, चमोली से दो, चंपावत से एक, पौड़ी से पांच, पिथौरागढ़ से एक, रुद्रप्रयाग से एक, टिहरी से तीन, उत्तरकाशी से दो टीमों को कम करने का निर्णय लिया गया है। जबकि हरिद्वार में पांच, यूएस नगर में तीन और देहरादून में दो टीमें बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

 

एक टीम में दो डॉक्टर 
आरबीएसके की एक टीम में दो डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट और एक स्टाफ नर्स शामिल होते हैं। यह टीम कई स्कूलों का भ्रमण कर बच्चों की स्क्रीनिंग करती है। लेकिन गांव दूर-दूर होने, छात्र संख्या कम होने के कारण टीम को परेशानी होती है। पिछले दिनों एनएचएम के अफसरों की समीक्षा में पहाड़ के डॉक्टरों के काम को संतोष जनक नहीं माना था।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत डॉक्टरों एवं टीमों की तैनाती बच्चों की संख्या के आधार पर की जा रही है। इसे पहाड़, मैदान के अनुसार नहीं देखा जाना चाहिए, केंद्र के मानकों के हिसाब से ही डॉक्टरों को तैनाती दी जा रही है।

Related Posts