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चारधाम यात्रा मार्ग पर हुई तीर्थयात्रियों की मौत के कुछ मामले भी कोरोना की इस भयावहता को बयां कर रहे

चारधाम यात्रा मार्ग पर हुई तीर्थयात्रियों की मौत के कुछ मामले भी कोरोना की इस भयावहता को बयां कर रहे

कोरोना वायरस इतनी बड़ी परेशानी बन चुका है कि इस बीमारी की चपेट में आने से लेकर रिकवरी होने के बाद भी ये सिर दर्द बना हुआ है। इस बीमारी के आफ्टर इफेक्ट चौंकाने वाले हैं। कोरोना पाजिटिव से निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद वायरस का शरीर से दुष्प्रभाव खत्म होने में काफी वक्त लग रहा है। चारधाम यात्रा मार्ग पर हुई तीर्थयात्रियों की मौत के कुछ मामले भी कोरोना की इस भयावहता को बयां कर रहे हैं। गुरुवार को सुबह 4.30 बजे एक और यात्री की हृदय गति रुकने से मौत हो गई है। इस बार चारधाम यात्रा मार्ग पर हुई तीर्थयात्रियों की मौत के कुछ मामले भी कोरोना की इस भयावहता को बयां कर रहे हैं।

चारधाम यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर स्वास्थ्य महानिदेशक डा. शैलजा भट्ट ने बुधवार को यात्रा मार्गों से संबंधित जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। स्वास्थ्य महानिदेशक ने बताया कि अभी तक चारधाम यात्रा के लिए आए 23 यात्रियों की आकस्मिक व दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हो चुकी है। बताया कि इनमें से कोई भी मृत्यु अस्पताल में नहीं हुई है और मृत्यु से पूर्व कोई भी हताहत यात्री चिकित्सालय पर उपचार के लिए नहीं लाया गया।सभी मृत्यु के संभावित कारणों में आकस्मिक हृदयघात, हाइपरटेंशन व अन्य बीमारियों से ग्रसित होना पाया गया है। पूर्व में कोविड होना या लांग कोविड भी एक प्रमुख कारण है। सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को इस बावत विस्तृत रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।

लांग कोविड वह अवस्था है, जिसमें कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके रोगियों में संक्रमण के कुछ लक्षण बने रहते हैं जो कि हफ्तों से लेकर महीनों तक रह सकते हैं। यहां संक्रमण से ठीक होने वालों में संक्रमण के लक्षण का हफ्तों तक रहना पोस्ट कोविड सिंड्रोम है।

स्वास्थ्य महानिदेशक ने बताया कि केदारनाथ मार्ग में आठ स्थायी चिकित्सालय और 14 अस्थायी मेडिकल रिलीफ पोस्ट हैं। गंगोत्री मार्ग में 10 स्थायी चिकित्सालय व तीन अस्थायी मेडिकल रिलीफ पोस्ट, बदरीनाथ मार्ग पर 19 स्थायी चिकित्सालय व दो अस्थायी मेडिकल रीलिफ पोस्ट और यमुनोत्री मार्ग पर 11 स्थायी चिकित्सालय व चार अस्थायी मेडिकल रिलीफ पोस्ट कार्य कर रहे हैं। यमुनोत्री मार्ग पर आठ फस्र्ट मेडिकल रिस्पोंडर इकाइयां भी कार्यरत हैं। यात्रियों को चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए 132 चिकित्सकों को विभिन्न अस्पतालों में तैनात किया गया है और सभी को चौबीस घंटे मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं। आकस्मिक उपचार व दुर्घटना/ट्रामा के दौरान जरूरतमंद व्यक्ति को रक्त की आवश्यकता को देखते हुए यात्रा मार्ग में आठ ब्लड बैंक व चार ब्लड स्टोरेज यूनिट भी संचालित हो रही हैं। यात्रियों को किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य सूचना के लिए 104 हेल्पलाइन काम कर रही है, जबकि 108 आपातकालीन सेवा की 102 एंबुलेंस व एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस भी इस यात्रा के लिए प्रमुख व संवेदनशील स्थानों पर तैनात की गई हैं।

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