ताजा खबरें >- :
उत्तराखंड विवि में दोहरी व्यवस्था के खिलाफ उतरी एबीवीपी

उत्तराखंड विवि में दोहरी व्यवस्था के खिलाफ उतरी एबीवीपी

श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय में दोहरी परीक्षा प्रणाली पर विरोध शुरू हो गया है। शुक्रवार को एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने लैंसडौन चौक पर विवि प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों ने विवि से संबद्ध हर कॉलेज में एक जैसी व्यवस्था लागू करने की मांग की। एबीवीपी के विभाग संगठन मंत्री विक्रम फर्सवाण के नेतृत्व में छात्र लैंसडौन चौक पर एकत्रित हुए। छात्रों ने श्रीदेव सुमन विवि के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। विक्रम ने कहा कि विवि प्रशासन ने केवल 51 सरकारी कॉलेजों में सेमेस्टर सिस्टम खत्म किया। जबकि खुद अपने मुख्य कैंपस और निजी कॉलेजों में सेमेस्टर ही लागू है। छात्र नेता पारस गोयल ने कहा कि एक ही विवि में दो तरह की व्यवस्था होने से छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान छात्रों ने विवि के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विवि प्रशासन का पुतला फूंका। प्रदर्शन करने वालों में डीबीएस छात्र संघ अध्यक्ष मोहन प्रसाद सती, एमकेपी अध्यक्ष मनीषा राणा, हिमांशु कुमार, सत्यम कनौजिया, मीनाक्षी, विशाल सिंह, सौरभ कुमार, तान्या वालिया, सागर तोमर, विपिन भट्ट, ऋषभ रावत, अर्जुन, गौरव तोमर, राहुल चौहान, सागर सोनकर, शुभम रावत, मृदुल भट्ट समेत अन्य लोग मौजूद रहे। श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय में दो परीक्षा प्रणाली लागू किए जाने का एनएसयूआइ ने कड़ा विरोध किया। चेतावनी दी कि यदि मांग पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। श्रीदेव सुमन विवि के दून विश्वविद्याल स्थित कैंप कार्यालय छात्रों ने प्रदर्शन किया। विवि में एक परीक्षा प्रणाली लागू करने के लिए एनएसयूआइ ने कुलपति को वार्ता के लिए बुलाया, लेकिन जब काफी देर तक कुलपति मौके पर नहीं पहुंचे तो छात्र आक्रोशित हो गए और कैंप कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। छात्र संगठन के बढ़ते रोष को भांपते हुए कुलपति डॉ. पीपी ध्यानी मौके पर पहुंचे। जिनके समक्ष छात्रों ने अपनी बात रखी। बताया कि एक विवि में एक ही पाठ्यक्रम के लिए दो तरह की व्यवस्था लागू होने से छात्र-छात्राएं असमंजस में हैं। एक ही पाठ्यक्रम में कुछ छात्र वार्षिक प्रणाली के तहत सात पेपर देंगे, जबकि सेमेस्टर प्रणाली के तहत 13 पेपर देने होंगे। छात्रों को वर्ष में दो बार सेमेस्टर परीक्षा देनी होगी। साथ-साथ दो बार आंतरिक परीक्षा में भी शामिल होना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में छात्र-छात्राएं दुविधा में हैं। कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में एक पाठ्यक्रम के लिए एक नियम लागू किया जाए।
Related Posts