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यमुना एक्सप्रेस-वे  पर 548 लोगों की मौत

यमुना एक्सप्रेस-वे पर 548 लोगों की मौत

यमुना एक्‍सप्रेस वे सुर्खियों में है। पहले की ही तरह इस बार भी यह एक्‍सप्रेस वे यहां पर हुए हादसे की वजह से ही सुर्खियों में है। हादसों के इस एक्‍सप्रेस का एक दर्दनाक सच यह भी है कि जब से यह चालू हुआ है तब से लेकर जनवरी 2017 तक इस पर करीब 4076 हादसे हुए, जिसमें करीब 548 लोगों की मौत हुई है।

साल दर साल यहां पर होने वाले हादसों में तेजी देखने को मिली है। 2015 की तुलना में इस एक्‍सप्रेस वे पर 2016 में हुए हादसों में करीब 30 फीसद की तेजी दर्ज की गई थी। लेकिन यह भी सही है कि इस दौरान हुए हादसों में 2015 की तुलना में लोगों की जान कम गई थी। 2016 में इस एक्‍सप्रेस वे पर करीब 1193 एक्‍सीडेंट की घटनाएं हुईं थीं। इनमें करीब 128 लोगों की मौत हुई थी। वहीं 2015 में यहां पर 919 हादसे हुए थे जिसमें 143 लोगों की मौत हो गई थी।

2014 में इस एक्‍सप्रेस वे पर 772 हादसे हादसे हुए जिसमें 127 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। इसके अलावा 2013 में यहां करीब 898 हादसे हुए जिसमें 118 लोगों की मौत हो गई थी। अगस्‍त 2012 जब इस एक्‍सप्रेस को जनता को सुपुर्द किया गया था उसके बाद दिसंबर 2012 तक ही इस पर करीब 294 हादसे हुए जिसमें 33 लोगों की जान चली गई थी।

 

बीते शुक्रवार को हुए हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई थी। ग्रेटर नोएडा के इलाके में हुई इस दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को राज्‍य सरकार ने दो-दो लाख रुपये मुआवजे की घोषणा भी की है। दो वाहनों के बीच यह टक्‍कर इतनी जबरदस्‍त थी बस का आगे वाले हिस्‍से के परखच्‍चे उड़ गए। बस जालौन से यात्री लेकर यमुना एक्सप्रेस वे के रास्ते दिल्ली जा रही थी।स्‍लीपर बस में फंसे यात्रियों को बड़ी मुश्किल से निकाला गया। शवों को भी कटर की मदद से बस की बॉडी काटकर बाहर निकला गया। लेकिन यहां पर सवाल महज मुआवजे के एलान का नहीं है, बल्कि इस एक्‍सप्रेस वे पर होने वाले हादसों की वजह को पहचान कर उसको दूर करने का है। 28 मार्च को जो हादसा इस एक्‍सप्रेस वे पर हुआ वह न तो पहली बार हुआ है और न ही इसकी वजह कोई नई है।

लगभग हर माह ही इस एक्‍सप्रेस वे पर हादसे आम बात हो गई है। वर्ष 2017 में सर्दियों के दिनों में इसी मार्ग पर करीब 18 गाडि़यां आपस में टकरा गई थीं। इस एक्‍सप्रेस की शुरुआत से देखा जाए तो यहां पर साल-दर-साल हादसों की संख्‍या में इजाफा हुआ है। जिसको देखते हुए इसको हादसों का ‘एक्‍सप्रेस वे’ कहना गलत नहीं होगा। हजारों करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्‍सप्रेस पर इस तरह के हादसों को रोकने के लिए जो उपाय किए जाने चाहिए थे उनका आज तक भी इंतजार है।

सितंबर 2018 में यमुना एक्सप्रेस-वे के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने इसकी सुरक्षा ऑडिट करने का आदेश दिया था। यह सुरक्षा ऑडिट ग्रेटर नोएडा के जीरो प्वाइंट से आगरा तक होना था। इसके लिए आइआइटी दिल्ली का चयन किया गया था। इसके ऑडिट का काम पूरा हो गया है और प्राधिकरण को 31 मार्च तक सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा निगरानी समिति के सामने इसकी रिपोर्ट पेश करनी है। आपको बता दें कि प्राधिकरण एक्सप्रेस वे का संचालन कर रही जेपी इंफ्राटेक के जरिये सुरक्षा उपायों को लागू कराएगा। आपको यहां पर ये भी बता दें कि इस एक्‍सप्रेस वे पर हादसों की सबसे बड़ी वजहों में ओवर स्‍पीड (30%), दूसरी वजह टायर का अचानक फटना (25%), तीसरी वजह ओवर टेकिंग (15%), चौथी वजह नींद का आना (10) और पांचवीं वजह बीच रास्‍ते में खड़े वाहन (5%) होते हैं।

यमुना एक्‍सप्रेस वे करीब 165 किमी लंबा है। यह देश का सबसे लंबा छह लेन का एक्‍सप्रेस वे है। इसके बनने की शुरुआत दिसंबर 2007 में तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री मायावती ने की थी। 9 अगस्‍त 2012 को यूपी के तत्‍कालीन सीएम अखिलेश यादव ने इसे जनता को बड़ी उम्‍मीदों के साथ सौंपा था। ग्रेटर नोयडा से शुरू होकर यह एक्‍सप्रेस वे आगरा तक जाता है। इसमें कोई शक नहीं कि इस एक्‍सप्रेस वे के बन जाने से आगरा की दूरी बेहद कम हो गई है।

इस एक्‍सप्रेस वे की एक खासियत यह भी है कि भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान इस पर दो बार टचडाउन का परीक्षण भी कर चुके हैं। इनमें से एक परीक्षण तो इसी माह हुआ था। इससे पहले 21 मई 2015 को इसी तरह का परीक्षण वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने किया था।
एक्‍सप्रेस वे की निगरानी के लिए इस पर हर पांच किमी की दूरी पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। लेकिन इसके बाद भी कोई हादसा होने पर पुलिस को वहां तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। इसकी वजह है कि हर 25 किमी की दूरी पर एक हाईवे पेट्रोल है। इस एक्‍सप्रेस वे पर वाहनों की रफ्तार की सीमा करीब 100 किमी प्रति घंटा है। लेकिन इस पर आने वाले वाहन इससे कहीं अधिक रफ्तार पर दौड़ते दिखाई देते हैं।

इस एक्‍सप्रेस वे पर लगातार बढ़ रहे हादसों को देखते हुए वर्ष 2015 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस याचिका के माध्‍यम से आगरा डेवलेपमेंट फाउंडेशन के सचिव केसी जैन ने इस एक्‍सप्रेस पर जान-माल की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने भी एक हाईलेवल कमेटी बनाकर इस पर हादसे रोकने को लेकर उपाय मांगे थे। कमेटी की रिपोर्ट में एक बात सामने आई थी कि इस पर होने वाले हादसे दो वजहों से होते हैं। इसमें पहला था ओवरस्‍पीड और दूसरा कारण था टायरों का बर्स्‍ट हो जाना। लेकिन हादसे बताते हैं कि इन पर अब तक कमेटी के सुझाव पर अमल आज भी बाकी है।

एक्‍सप्रेस वे पर सड़क हादसों को लेकर सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टिट्यूट ने भी एक रिपोर्ट तैयार की थी जिसके बाद उन्‍होंने भी कुछ उपाय करने की बात कही थी, लेकिन इन्‍हें भी आज तक अमल में नहीं लाया जा सका है। इसमें सीसीटीवी कैमरों की संख्‍या बढ़ाने, रास्‍ते में जगह-जगह छोटे स्‍पीड़ ब्रेकर लगाने की भी बात कही गई थी, जिससे वाहन चलाने वाला चौकन्‍ना रहे ओर स्‍पीड़ को अधिक न रख सके।

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