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चारधाम यात्रा सुरु, संचार सुविधाएं बंद

सूचना तकनीकी के वर्तमान दौर में जहां सरकार का जोर भी ऑन लाइन व्यवस्थाओं पर है, वहीं दूरस्थ क्षेत्र ही नहीं यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम भी संचार सुविधाओं से अछूते हैं। आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील और चीन सीमा से सटा होने के कारण सामरिक महत्व के बावजूद जिले में संचार सेवाएं बदहाल है।
यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम समेत दर्जनों पर्यटन स्थलों की मौजूदगी और चीन सीमा से लगे विषम भौगोलिक परिस्थिति वाले जनपद में संचार सेवाएं बदहाली के दौर से गुजर रही हैं। यूं तो यहां कई निजी कंपनियों द्वारा भी जगह-जगह टावर लगाकर मोबाइल फोन की सेवाएं दी जा रही है, लेकिन जिले का बड़ा हिस्सा बीएसएनएल की सेवाओं पर निर्भर है। जिले के सुदूरवर्ती मोरी प्रखंड के अधिकांश गांव संचार सेवाओं के लिए हिमाचल पर निर्भर है।
यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम की यात्रा पर हर साल देश-विदेशी से लाखों तीर्थयात्री एवं पर्यटक पहुंचते हैं। यात्रा मार्ग के कई हिस्सों में तो नेटवर्क की समस्या के कारण हादसे होने की स्थिति में सूचनाओं का आदान-प्रदान भी नहीं हो पाता, जिससे राहत एवं बचाव कार्य में दिक्कत आती है। मोरी प्रखंड के पूर्व जिला पंचायत सदस्य दोणी गांव के रोजी सिंह सौंदाण, देवजानी के जयराम चैहान, जखोल के गंगा सिंह रावत, ढाटमीर के राजपाल रावत का कहना है कि सरकार ने अधिकांश सरकारी योजनाओं और नौकरियों के आवेदन में ऑन लाइन व्यवस्था तो लागू कर दी, लेकिन दूरस्थ क्षेत्रों तक दूरसंचार सेवाओं को चाक चैबंद करने की जहमत नहीं उठायी। खंड विकास अधिकारी कार्यालय मोरी को मनरेगा आदि कार्यों की ऑन लाइन रिपोर्टिंग आदि कार्यों के लिए पुरोला की ओर 15 किमी दूर खरसाड़ी के एक होटल में अपना कैंप कार्यालय संचालित करना पड़ रहा है। बीडीओ बीडी डिमरी ने स्वीकारा कि संचार सेवाओं की बदहाली के चलते सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। इस संबंध में बीएसएनएल के अधिकारियों को कई बार अवगत कराने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

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