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प्रदेश सरकार ने  कोरोनाकाल में सबसे ज्यादा राशन पर खर्च किए रूपए

प्रदेश सरकार ने कोरोनाकाल में सबसे ज्यादा राशन पर खर्च किए रूपए

प्रदेश में कोरोनाकाल में आपदा राहत निधि से बचाव और अन्य संसाधनों पर जिले में छह महीने में 10.77 करोड़ रुपये खर्च हो गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा खर्च लॉकडाउन के दौरान गरीबों की भोजन-राशन व्यवस्था में हुआ। प्रतिबंधित इलाकों में बल्लियां लगाने के खर्च का 44.59 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

कोरोना महामारी से निपटने के लिए जिले को शासन को अब तक तीन किश्तों में 13 करोड़ रुपये मिले हैं। पांच करोड़ रुपये की पहली किश्त पांच अप्रैल, तीन करोड़ रुपये की दूसरी किश्त दो जून और पांच करोड़ रुपये की तीसरी किश्त बीते एक सितंबर को जारी की गई।

इनमें जिला प्रशासन ने अलग-अलग विभागों का भुगतान कर 10.77 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। अब महज 2.23 करोड़ रुपये प्रशासन के पास बचे हैं। इनमें भी कई बिलों का भुगतान होना शेष है, जिन्हें जिलाधिकारी स्वीकृत करेंगे।

डाक्टरों के होटल का खर्च 1.83 करोड़ रुपये : हाल में दिनों में सबसे ज्यादा खर्च होटल के बिलों का आ रहा है। कोरोना अस्पताल और कोविड केयर सेंटरों में तैनात चिकित्सकों को होटलों में ठहराया जा रहा है। डाक्टरों के होटलों में ठहरने के खर्च के 1.83 करोड़ का रुपये का जिला प्रशासन भुगतान कर चुका है।

यह किए खर्च
-4.50 करोड़ रुपये जिला पूर्ति अधिकारी। (लॉक डाउन में बाजार से खाद्य सामग्री और भोजन के पैकैट खरीदे)
-2.65 करोड़ रुपये तहसील स्तर से खर्च। (क्वारंटाइन सेंटर और ग्राम प्रधानों को जारी किए)
-1.83 करोड़- होटल संचालकों को दिए। (कोराना उपचार कर रहे चिकित्सकों का बिल)
-58.75 लाख रुपये- जिला पूर्ति अधिकारी। (कोरोना व्यवस्था अधिगृहीत वाहनों का बिल)
-35.31 लाख रुपये- प्रवासियों को भेजने के लिए बन्नू स्कूल और स्पोट्र्स कॉलेज में व्यवस्था बनाने में खर्च हुए।
-25 लाख रुपये- आरटीओ देहरादून- (परिवहन व्यवस्था के लिए)
-15 लाख रुपये- जिला पंचायत को दिए। (क्वारंटाइन सेंटरों की व्यवस्था के लिए)

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