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जनता से किये 85 प्रतिशत वादों को किया पूरा-सीएम त्रिवेंद्र

जनता से किये 85 प्रतिशत वादों को किया पूरा-सीएम त्रिवेंद्र

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि साढ़े तीन साल के कार्यकाल में उनकी सरकार ने पार्टी के घोषणा पत्र (विजन डाक्यूमेंट) के 85 प्रतिशत वादों को पूरा किया है। उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि उन्हें अपने घोषणा पत्रों को भी पढ़ लेना चाहिए। उनको भी पांच साल सरकार बनाने का मौका मिला, 20 प्रतिशत भी घोषणा पूरी नहीं कर पाए थे। वहीं, मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड 19 महामारी से लड़ने के लिए सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं हैं, बताया कि अभी हमने 1/10वां हिस्सा ही खर्च किया है।

उन्होंने कहा कि सरकार में आने के बाद हमने कहा कि भ्रष्टाचार पर हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति होगी। साढ़े तीन साल में किसी को भी मौका नहीं मिला कि भाजपा सरकार पर कोई उंगली उठा सके। लोगों ने लोकायुक्त की बात कही, मैंने कहा कि लोकायुक्त गठन करना कोई बड़ी बात नहीं हैं। हम लोकायुक्त के विरोध में नहीं हैं, लेकिन मैंने शुरू से कहा है कि हम ऐसा काम ही क्यों करें कि हमें इसकी जरूरत पड़े। हमने यह कर दिखाया है कि भ्रष्टाचार मुक्त सरकार चलाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान तमाम तरह की चिंताएं थीं।
सुझाव भी हमारे पास हैं, लेकिन हमने यह निर्णय लिया कि जो उत्तराखंड आना चाहता है, उस एक-एक भाई बहन को वापस लाने का काम आपका यह भाई करेगा, आपका बेटा करेगा। उन्होंने कहा कि कोविड 19 महामारी से निपटने के लिए सरकार ने पर्याप्त इंतजाम किए। कोविड सेंटरों में 17 हजार बेड उपलब्ध हैं। वेंटीलेटर की संख्या पांच से छह गुना बढ़ाई। हर जिले में आईसीयू का गठन किया। 400 डाक्टरों की नियुक्ति की और यह प्रक्रिया जारी है। सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं।
कोविड 19 में कार्यकर्ता अग्रदूत बनें
उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार के विवाद की दिक्कत आ रही है, इस विवाद की जरूरत नहीं है। मैं बताना चाहता हूं कि मृतक को संक्रमण रहित किया जाता है। अंतिम संस्कार करने का काम प्रशिक्षित लोगों द्वारा कराया जाता है। शव परिवार को नहीं सौंपा जाता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे अग्रदूत बनें और लोगों को इस बारे में जागरूक करें।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल पर वर्चुअल प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि अपै्रल 2017 से सितम्बर 2020 तक विभिन्न विभागों के अंतर्गत कुल 7 लाख 12 हजार से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किया गया। इनमें से नियमित रोजगार लगभग 16 हजार, आउटसोर्स/अनुबंधात्मक रोजगार लगभग 1 लाख 15 हजार और स्वयं उद्यमिता/प्राईवेट निवेश से प्रदान/निर्माणाधीन परियोजनाओं से रोजगार लगभग 5 लाख 80 हजार है।
उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा की गई भर्तियों की बात की जाए तो इसके माध्यम से वर्ष 2014 से 2017 तक कुल 08 परीक्षाएं आयेजित की गईं जिनमें 801 पदों पर चयन पूर्ण किया गया। जबकि वर्ष 2017 से 2020 तक कुल 59 परीक्षाएं आयोजित की गईं जिनमें 6000 पदों पर चयन पूर्ण किया गया। वर्तमान में उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में 7200 पदों पर अधियाचन/भर्ती प्रक्रिया गतिमान है।

गैरसैंण पर बडा फैसला ; गैरसैंण को उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया गया। इसकी विधिवत अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। अब गैरसैण में राजधानी के अनुरूप आवश्यक सुविधाओं के विकास की कार्ययोजना  बनाई जा रही है। भविष्य की आवश्यकताओं, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की दृष्टि से चारधाम देवस्थानम बोर्ड का गठन किया गया है। इसमें तीर्थ पुरोहित और पण्डा समाज के लोगों के हक हकूक और हितों को सुरक्षित रखा गया है। अटल आयुष्मान योजना में राज्य के सभी परिवारों को 5 लाख रूपए वार्षिक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा देने वाला उत्तराखण्ड, देश का पहला राज्य है। अभी 2 लाख 5 हजार मरीजों को योजना में निशुल्क उपचार मिला है। जिस पर 180 करोड़ रूपए से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। नेशनल पोर्टेबिलिटी की सुविधा देते हुए देशभर के 22 हजार से अधिक अस्पताल इसमें सूचीबद्ध हैं।

ई-कैबिनेट, ई-ऑफिस, सीएम डैश बोर्ड उत्कर्ष, सीएम हेल्पलाईन 1905, सेवा का अधिकार और ट्रांसफर एक्ट की पारदर्शी व्यवस्था के चलते कार्यसंस्कृति में गुणात्मक सुधार हुआ है। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस सरकार की प्रमुख नीति है।
 पर्वतीय राज्य की अवधारणा से बने उत्तराखण्ड में पहली बार किसी सरकार ने रिवर्स पलायन पर सुनियोजित तरीके से काम शुरू किया है। एमएसएमई के केंद्र में पर्वतीय क्षेत्रों को रखा गया है। सभी न्याय पंचायतों में क्लस्टर आधारित एप्रोच पर ग्रोथ सेंटर बनाए जा रहे हैं। 100 से अधिक ग्रोथ सेंटरों को मंजूरी भी दी जा चुकी है। बहुत से ग्रोथ सेंटर शुरू भी हो चुके हैं। हर गांव में बिजली पहुंचाई गई है।
किसानों को तीन लाख रूपए और महिला स्वयं सहायता समूहों को पांच लाख रूपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के गन्ना किसानों को अवशेष गन्ना मूल्य का शत प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित किया गया है।

13 डिस्ट्रिक्ट-13 न्यू डेस्टीनेशन से नए पर्यटन केंद्रों का विकास हो रहा है। होम स्टे योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। विभिन्न रोपवे प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है।
जलसंरक्षण और जलसंवर्धन पर काफी काम किया गया है। प्रदेश की नदियों, झीलों, तालाबों और जलस्त्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए व्यापक जनअभियान शुरू किया गया है।डबल इंजन का असर साफ-साफ देखा जा सकता है। केंद्र सरकार द्वारा लगभग एक लाख करोड़ रूपए की विभिन्न परियोजनाएं प्रदेश के लिए स्वीकृत हुई हैं। बहुत सी योजनाओं पर तेजी से काम भी चल रहा है। इनमें ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, चारधाम सड़क परियोजना़, केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण, भारतमाला परियोजना, जमरानी बहुद्देशीय परियोजना, नमामि गंगे, भारत नेट फेज -2 परियोजना, एयर कनेक्टीवीटी पर किया जा रहा काम मुख्य है। उत्तराखण्ड पहला राज्य है जहां उड़ान योजना में हेली सेवा प्रारम्भ की गई है। श्री बदरीनाथ धाम का भी मास्टर प्लान बनाया गया है।

उन्होने कहा की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में हम पूरी तरह सफल रहे है नीति आयोग द्वारा जारी ‘‘भारत नवाचार सूचकांक 2019’’ में पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों की श्रेणी में उत्तराखण्ड सर्वश्रेष्ठ तीन राज्यों में शामिल है। राज्य को 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बेस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट घोषित किया गया। स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तराखंड को सात पुरस्कार मिले हैं। ‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’ अभियान में ऊधमसिंह नगर जिले को देश के सर्वश्रेष्ठ 10 जिलों में चुना गया। उत्तराखंड को खाद्यान्न उत्पादन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दूसरी बार कृषि कर्मण प्रशंसा पुरस्कार दिया गया। जैविक इंडिया अवार्ड 2018 के साथ ही मनरेगा में देशभर में सर्वाधिक 16 राष्ट्रीय पुरस्कार राज्य को मिले। मातृत्व मृत्यु दर में सर्वाधिक कमी के लिए उत्तराखण्ड को भारत सरकार से पुरस्कृत किया गया है।।

 

 

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