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भारत सरकार द्वारा तीन दशक बाद नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी

भारत सरकार द्वारा तीन दशक बाद नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी

भारत सरकार की कैबिनेट ने बुधवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। और अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है।
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में नई शिक्षा नीति को स्वीकृति दी गई है। पिछले तीन दशक बाद भी शिक्षा नीति में बदलाव नहीं हुआ था। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत सरकार द्वारा शिक्षा नीति को लेकर दो समितियां का गठन किया गया था। जिनमे से एक टीएसआर सुब्रमण्यम समिति तथा दूसरी डॉ. के कस्तूरीरंगन समिति बनाई गई थी।
यह निर्णय मोदी सरकार की कैबिनेट बैठक के दौरान लिया गया है. इस बैठक के दौरान मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति को भी मंजूरी दे दी है नई शिक्षा नीति में अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किए जाने का फैसला हुआ है।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि नई शिक्षा नीति के लिए सभी बड़े स्तरो पर विचार विमर्श किया गया। तक़रीबन दो लाख पचास हजार ग्राम पंचायतों, 6600 पंचायत समितियों और 676 जनपदों में सर्वे कराया गया। सरकार की ओर से बताया गया कि नई शिक्षा नीति के तहत कोई छात्र एक कोर्स के बीच में अगर कोई दूसरा कोर्स करना चाहे तो पहले कोर्स से सीमित अंतराल समय के लिए ब्रेक लेकर कर सकता है।

भारत सरकार की शिक्षा नीति के अनुसार वर्तमान की व्यवस्था में 4 साल इंजीनियरिंग पढ़ने के बाद या 6 सेमेस्टर पढ़ने के बाद अगर कोई छात्र किसी कारण वश आगे नहीं पढ़ पता है। तो उसके पास कोई उपाय शेष नहीं रहता और उसका अब तक किया गया कोर्स व्यर्थ हो जाता है। नई नीति के अनुसार ये रहेगा कि एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा, तीन या चार साल के बाद डिग्री मिल सकेगी।

भारत में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए नई शिक्षा नीति के माध्यम से भारतीय शिक्षा पद्धति के विभिन्न स्तरो पर कुछ बदलाव होंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए प्राइमरी और सेकेंडरी स्तर पर कुछ बड़े बदलाव होने की संभावना है। इसके अलावा उच्च शिक्षा के तंत्र में भी बदलाव की आशा है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति का गठन सवर्प्रथम 1986 में किया गया था। और इसके बाद 1992 में इसमें कुछ परिवर्तन किए गए थे परन्तु पिछले तीन दशक बाद भी आज के आधुनिक शिक्षा नीति को लेकर कोई बड़ा परिवर्तन नहीं किये गए है। और आज भी भारत के युवा उच्च शिक्षा के लिए विदेशो की तरफ रुख कर रहे थे। परतु आज में शिक्षा तंत्र में परिवर्तन की मांग को देखते हुए मोदी सरकार द्वारा उठाये गए कदम से नयी संभावना जगी है।

भारत सरकार का विचार है कि शिक्षा के क्षेत्र में बड़े स्तर पर परिवर्तन की आवशयकता है। जिससे भारत पुरे विश्व में ज्ञान का प्रमुख स्रोत बन सके. प्रगतिशील और विकासशील समाज के निर्माण के लिए सभी को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा दिए जाने की जरूरत है।

जानकारी के अनुसार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं के माधयम से अध्यनन पर अधिक जोर हो सकता है। जो अतिआवश्यक है इससे अंग्रेजी भाषा पर निर्भरता काम होगी इसके अलावा भारतीय भाषाओं में लिखे गए साहित्य और संस्कृत भाषा के वैज्ञानिक महत्व को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सकता है।

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