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पाकिस्तानियों को खदेड्ते हुये दस साथी जवानों के साथ शहीद हुये थे पौडी के कुलदीप

पाकिस्तानियों को खदेड्ते हुये दस साथी जवानों के साथ शहीद हुये थे पौडी के कुलदीप

शिद्दत से निभाओ किरदार अपना,कि परदा गिरने के बाद भी तालियां बजती रहे।

पाकिस्तान के विश्वासघात से कारगिल में युद्ध शुरू हुआ।सारे देश में राष्ट्रीयता का प्रचंड वेग बहने लगा।देश की चर्चित तिहाड़ जेल के कैदी तक भी अपने को सीमाओं पर भेजने की मांग करने लग गये थे।सारे अंतर्द्वंद्व,मतभेद मानो देश से गायब हो गये।पाकिस्तान घुसपैठ का भारतीय सेना के जांबाजों ने अद्धभुत पराक्रम दिखाया।सामरिक रूप से पाकिस्तान जिस स्तिथि में था,उस स्तिथि में उसका जवाब देना बहुत कठिन था,परन्तु भारतीय वीरों ने पाक की घुसपैठ का करारा जवाब दिया।
इस दौरान भारतीय सेना के कई रणबांकुरे देश की हिफाजत के नायाब पराक्रम में “शहीद”भी हो रहे थे।देशवासी इससे भावुक होते लेकिन साथ में उन्हें इस बात का गर्व होता कि देश की सीमाओं पर भारतीय सेना के जवान हमारी हिफाजत के लिए अपनी वीरता की महान परम्परा को बनाये रखे हैं।
कारगिल युद्ध में गढ़वाल राइफल के जवान भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे थे,कई सैनिक देश के खातिर शहीद भी हो रहे थे,,इनमें से एक राइफलमैन कुलदीप सिंह रावत भी थे,कारगिल सेक्टर के द्रास पॉइंट 4700 को पाकिस्तान से मुक्त कराने के दौरान कुलदीप सिंह समेत दस जवानों ने शहादत पाई।
28जून1999 की रात्रि को गढ़वाली सैनिकों ने अपनी बहादुरी से द्रास पॉइंट 4700 को शत्रु से मुक्त करा दिया।28 जून को ऑपरेशन विजय के दौरान राइफलमैन कुलदीप सिंह चार्ली कंपनी के अग्रणी सेक्शन में शामिल थे।जिसे द्रास सेक्टर में पॉइंट 4700 के एक ठिकाने पर कब्जा करने का कार्य सौंपा गया।इस ठिकाने पर संगरो से शत्रु स्वचालित हथियारों से गोलीबाजी कर रहा था।जब यह अग्रणी सेक्शन अपने गंतव्य की तरफ बढ़ रहा था तो नजदीक के संगर से शत्रु द्वारा की जा रही भारी गोलाबारी की चपेट में आ गये।व्यक्तिगत सुरक्षा की चिंता ना करते हुये बिना राइफलमैन कुलदीप ने बाई और से बड़े बड़े पत्थरो के बीच संगर को नष्ट करने के लिए आगे बढे।इस दौरान उनकी टांग में गोली आ लगी।खून से लथपथ तथा खतरे की परवाह नही करते हुये वे युद्ध नाद करते हुए हिप पोजीशन से गोलाबारी करते हुए आगे बढ़ते रहे।उनके इस साहसपूर्ण कार्रवाई को देखते हुये शत्रु संगर को छोड़कर अंधाधुंध गोलाबारी करते हुये भाग खड़े हुये।इस गोलाबारी के दौरान राइफलमैन कुलदीप ने तीन घुसपेटियो को मार डाला तथा दो अन्य को घायल कर दिया,,इस दौरान शत्रु की एक गोली उनके सिर पर लगी और देश का यह लाडला मौके पर ही वीर गति को प्राप्त हो गया।
पौड़ी जिले के नांदलसिंयु पट्टी के भिताई मल्ली निवासी 26 वर्षीय राइफलमैन कुलदीप की शहादत की खबर ज्यो ही मण्डल मुख्यलय पौड़ी पहुंचते ही दुःख व गर्व के मिश्रित भाव में लोग घुल गये।शत्रु देश की कारिस्तानी से लोगो के मन में आक्रोश था।कारगिल में हमारे जवानों की शौर्य गाथा हर चौराहे,दुकान,घरों में हो रही थी।शहीद कुलदीप के अलावा कोई अन्य बात उन दिनों पौड़ी शहर में नही थी,,कारगिल से शहीद के पार्थिव शव गढ़वाल राइफल रेजिमेंट सेंटर लैंसडौन पहुंचा,, वहां सैन्य परम्परा में श्रदांजलि देने के बाद तीन जुलाई को शहीद कुलदीप सिंह का शव पौड़ी नगर पहुंचा।शहीद के पार्थिव शरीर के नगर में पहुंचने की खबर से सेकड़ो लोग बस स्टेशन में जमा हो गये।गुस्से से भरे लोग पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे,,,स्टेशन के पास एक बड़ा बैनर लहरा रहा था जिसमे शहीद को नमन करते हुए उनका आभार व्यक्त किया गया था।विशेष सैन्य वाहनों से से जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर बस स्टेशन पहुंचा तो सभी के नेत्र आंसुओ से भीगे हुये थे,,धारा रोड से माल रोड की ओर जाने वाली पगडंडी पर खड़ी कुछ महिलाएं तो दहाड़ मार कर रोती हुई बेसुध तक हो गयी।,,युवाओं ने पाकिस्तान मुर्दाबाद,भारत माता की जय,,जब तक सूरज चाँद रहेगा,कुलदीप तेरा नाम रहेगा;नारे लगाये।प्रशसन ने शहीद के पार्थिव शरीर को कलेक्ट्रेट परिसर में रखा,पूरे परिसर में तिल रखने की जगह नही थी,सब लोग शहीद के अंतिम दर्शन करने करना चाह रहे थे।श्रीनगर में अलकनन्दा के तट हजारो लोग की उपस्तिथि में शहीद कुलदीप पंचतत्व में समा गये, लेकिन वीरता की कहानी लिख गये जिसे सुनकर सीना चौड़ा हो जाता हो।
2अक्टूबर 1974 को जन्मे भारत माता के अमर सपूत कुलदीप सिंह का जन्म भिताई निवासी श्री हुकुम सिंह रावत व श्रीमती कमला देवी के घर हुआ था।बचपन से ही साहसी कुलदीप फुटबॉल का भी अच्छा खिलाडी था।चार भाइयो व पांच बहिनो में सबके दुलारे कुलदीप ने राजकीय इंटर कॉलज कुम्भिचौड़ में इंटर करने के बाद 1994 में देश सेवा हेतु गढ़वाल राइफल में भर्ती हुये।अपने अदम्य साहस व् कर्तव्यनिष्ठ के लिए वे साथियों में खासे लोकप्रिय थे।शहीद कुलदीप को उनके अदम्य साहस के लिए मरणोपरांत भारत सरकार ने वीर चक्र से संम्मानित किया गया।
वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र बिष्ट की कलम से

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