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सभी आरोप गलत और आधारहीन -त्रिवेंद्र

सभी आरोप गलत और आधारहीन -त्रिवेंद्र

भ्रष्टाचार के मामले में केस दर्ज कर सीबीआइ को जांच का आदेश देने के उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।  उत्तराखंड सरकार ने भी विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। रावत ने हाईकोर्ट के आदेश का विरोध करते हुए याचिका में कहा है कि वह चुने हुए मुख्यमंत्री हैं और राजनैतिक लाभ लेने के लिए इस विवाद में बेवजह उनका नाम घसीटा गया है।

याचिका में कहा गया है कि मुख्यमंत्री पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर व्‍हाट्स एप पर हुए कन्वरशेसन के आधार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। वहीं उत्तराखंड सरकार की याचिका में भी हाईकोर्ट के आदेश का विरोध करते हुए कहा गया है कि उमेश शर्मा के खिलाफ फर्जीवाड़ा आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज था। उस पर गंभीर आरोप थे। हाईकोर्ट को एफआइआर रद करने की अपनी सन्निहित शक्ति का इस्तेमाल विरले मामलों में करना चाहिए। हाईकोर्ट का एफआइआर रद करने और सीबीआइ को अन्य मामला दर्ज कर जांच करने का आदेश देना ठीक नहीं है।

बता दें कि सेवानिवृत प्रोफेसर हरेन्द्र सिंह रावत ने देहरादून के राजपुर थाने में उमेश शर्मा के खिलाफ ब्लैकमेलिंग, दस्तावेजों की कूट रचना और गलत तरीके से बैंक खातों की जानकारी हासिल करने का आरोप लगाते हुए एफआइआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया था कि उमेश ने सोशल मीडिया पर वीडियो डाला था जिसमें प्रोफेसर रावत और उनकी पत्नी सविता रावत के खाते में नोटबंदी के दौरान झारखंड के अमृतेश चौहान ने 25 लाख रुपये की रकम जमा कराई थी। 25 लाख की यह रकम रावत को देने को कहा गया।

प्रोफेसर रावत के अनुसार सभी तथ्य असत्य हैं और उमेश ने फर्जीवाड़ा करके उनके बैंक के कागजात बनवाए। बैंक खाते की सूचना भी गैरकानूनी तरीके से हासिल की। बता दें कि उमेश शर्मा ने उक्‍त एफआईआर रद कराने के लिए हाईकोर्ट में उक्त याचिका दाखिल की थी जिस पर नैनीताल उच्‍च न्‍यायालय ने फैसला दिया है। इसी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मुख्यमंत्री और राज्य सरकार दोनों पहुंची हैं।

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